राजनीतिक पक्ष
टेस्ट कर, सीमा, पार्टी या चुनाव पर एक भी सवाल नहीं करता, इसलिए यहाँ का कोई अंक मतपत्र की ओर इशारा नहीं करता। पैमाना इतना दर्ज करता है कि नियम किस तरह पकड़े जाते हैं, और ऊपरी सिरे के लोग हर दिशा में बदलाव की दलील देते हैं।
खुलापन · पहलू O6
यह पहलू पार्टी और मतपत्र से कुछ नहीं लेता। यह इतना नापता है कि तय मानी गई बात को दोबारा खोलना कितना आसान लगता है: क्या अधिकार, रिवाज और विरासत में मिले नियमों को अपनी उपयोगिता बार-बार साबित करनी पड़ती है, या लंबी सेवा उन्हें पहले ही भरोसा दिला चुकी है।
मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत
दसों कथन एक ही रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमते हैं: उन नियमों के साथ रिश्ता जो आपने नहीं लिखे। वे परंपरा, अधिकार और यह पूछते हैं कि जमी हुई रीत दोबारा देखने लायक़ है या नहीं, पर यह कभी नहीं कि नतीजा क्या निकला। किसी ठोस बात पर असहमत दो लोग यहाँ एक ही जगह बैठ सकते हैं: पैमाना मुद्रा गिनता है, निष्कर्ष नहीं।
परिवार इसका खुलापन है, अनजाने की ओर खिंचाव जमा करने वाला आयाम और छह आदतों का जोड़, पर आयाम का नाम और पहलू का नाम एक चीज़ नहीं: परंपरा पर सवाल उसकी एक खिड़की। कल्पनाशीलता वही खिंचाव भीतर की दुनिया पर लगाती है, कलात्मक रुचि सुंदरता पर, नवीनता की चाह अनजानी जगहों पर, और यह पहलू नियमों पर। वह हिस्सा यह लगभग अकेले उठाता है।
नाम पर एक बात। अंग्रेज़ी शोध में इसी पैमाने का नाम Liberalism है, और वही सबसे ग़लत जगह ले जाता है: हिंदी में इसका सीधा अनुवाद उदारवाद पार्टी के ठप्पे जैसा सुनाई देता है, जबकि पैमाने में दलगत अर्थ है ही नहीं। शब्द व्यक्तित्व शोध का है और आज की पार्टी-व्यवस्थाओं से बहुत पहले गढ़ा गया।
शोध की भाषा में इसी ज़मीन को Values यानी मूल्य कहा जाता है, पुराने लेखन में अपरंपरागतता। अंग्रेज़ी नाम Liberalism सबसे ज़्यादा दिखता है और भ्रम भी वही देता है। यहाँ के कथन जॉनसन के छापे खुले संग्रह से आते हैं।
पूरे टेस्ट में इसी पहलू का नाम सबसे ज़्यादा भटकाता है, इसलिए ये तीन पंक्तियाँ ज़्यादा वज़न रखती हैं।
टेस्ट कर, सीमा, पार्टी या चुनाव पर एक भी सवाल नहीं करता, इसलिए यहाँ का कोई अंक मतपत्र की ओर इशारा नहीं करता। पैमाना इतना दर्ज करता है कि नियम किस तरह पकड़े जाते हैं, और ऊपरी सिरे के लोग हर दिशा में बदलाव की दलील देते हैं।
कम अंक धार्मिकता और ऊँचा उसका उलटा पढ़ लिया जाता है, और दोनों पढ़तें निशाने से आगे हैं। कथन इतना पूछते हैं कि तय बात कितनी आसानी से दोबारा खुलती है, यह कभी नहीं कि इंसान मानता क्या है। अपनी ही परंपरा से बहस करने वाला आस्तिक ऊपर बैठता है, और जिसे विरासत का ढाँचा वज़न उठाता दिखे वह बिना आस्था के भी नीचे।
रीत पर सवाल उठाना और लोगों को तंग करना अलग बातें हैं, और आँकड़े साफ़ हैं। सहयोग के साथ रिश्ता 0.01 का है, क्रोध के साथ माइनस 0.02 और भरोसे के साथ 0.04, यानी लगभग शून्य। नियम क्यों है, यह पूछना बरताव पर कुछ नहीं बताता।
इस पैमाने पर कोई सिरा समझदार नहीं। हर सिरा वह चीज़ ख़रीदता है जिसकी समूह को ज़रूरत पड़ती है, और दाम उस सिक्के में चुकाता है जो दूसरे सिरे को दिखता नहीं।
नियम को यहाँ दोबारा खोली जा सकने वाली दलील माना जाता है, इसलिए जल्दी दिखता है कि कोई चलन उस वजह से जी रहा है जो ख़ुद कब की जा चुकी। बिल घर्षण में आता है: हर दोबारा खुला सवाल कमरे का वक़्त लेता है, और कई एक साथ खुलें तो पाँव तले ज़मीन हट जाती है।
किसी भी नियम से आपका पहला सवाल यही होता है कि क्यों। रिवाज़ को अपनी जगह कमानी पड़ती है, और किसी बड़े ओहदे को सम्मान उसके तर्क साबित होने के बाद ही मिलता है।
विरासत में मिले इंतज़ाम यहाँ दबे हुए तजुर्बे की तरह पढ़े जाते हैं: किसी के पास वजह रही होगी, और वह अकसर यहाँ से दिखती नहीं। दाम जड़ता में चुकता है: जिस नियम का काम ख़त्म हो चुका वह भी अपनी जगह रखता है, क्योंकि भीतर से उसे दोबारा खोलने का धक्का नहीं उठता।
जो चीज़ वक़्त की कसौटी पर टिकी है उसे आपका सम्मान मिलता है। नियम और रीति बचाव के लायक़ लगते हैं, और राय धीरे-धीरे, ठोस वजह से बदलती है।
करीब चार दहाई प्रोफ़ाइल बीच की पट्टी में बैठती हैं, और वह किसी रुख़ की ग़ैरमौजूदगी नहीं, ख़ुद एक चलता हुआ रुख़ है। कुछ नियम दोबारा खोले जाते हैं, ज़्यादातर जहाँ हैं वहीं रहते हैं।
पट्टियों की कटाई जॉनसन की 30/40/30 परंपरा से आती है, किसी राजनीतिक पैमाने से नहीं। अंक इतना बताता है कि नियम किस तरह पकड़े जाते हैं, यह नहीं कि निकाले गए नतीजे टिकाऊ हैं।
कच्चा अंक दस जवाबों का जोड़ है, इसलिए वह 10 से 50 के बीच रहता है। नीचे का वक्र 135,947 पूरी प्रोफ़ाइल से बना है और पड़ोसी पहलुओं के वक्रों से साफ़ नीचे बैठता है।
| पर्सेंटाइल | कच्चा स्कोर |
|---|---|
| 10 | 21 |
| 25 | 25 |
| 50 | 30 |
| 75 | 35 |
| 90 | 40 |
आधी प्रोफ़ाइल 25 और 35 अंक के बीच गिरती हैं, माध्यिका 30 है, और कच्चे 30 अंक 52वें पर्सेंटाइल पर आते हैं। आयाम के बाकी पाँच पहलुओं का औसत 35.3 से 40.2 के बीच है, यानी यह पहलू हर एक से नीचे है: सबसे नज़दीकी से पाँच अंक और सबसे ऊँचे से दस। पर्सेंटाइल की तुलना अपने ही लिंग और उम्र के लोगों से होती है।
इस नाम वाले पैमाने पर दो समूह-अंतर अपने आप मान लिए जाते हैं, और नाप में कोई बड़ा नहीं निकलता।
महिलाओं का औसत 29.97 अंक है और पुरुषों का 29.66, यानी चालीस अंक के फैलाव पर 0.31 का फ़ासला; तीस पहलुओं में सिर्फ़ दो लिंगों को इससे कम बाँटते हैं। उम्र ज़्यादा हिलाती है: 21 साल से कम और 60 पार वालों के बीच दोनों वक्र एक से दो अंक गँवाते हैं, पुरुष 29.8 से 28.0 और महिलाएँ 30.0 से 28.7 पर, जबकि कर्तव्यनिष्ठा के पहलू उसी दूरी पर चढ़ते हैं। सबसे बुज़ुर्ग खानों में हर लिंग के करीब 250 लोग हैं, सिरे पतले हैं।
आयाम का नाम खुलापन है, पहलू का नाम परंपरा पर सवाल: परिवार छह आदतों का जोड़ है, यह उनमें एक। पूरे टेस्ट में यह सबसे ढीला पैमाना है, अपने ही आयाम के साथ 0.34 पर, यानी टेस्ट की दूसरी सबसे कमज़ोर ऐसी पकड़। भीतर बौद्धिक जिज्ञासा 0.27 पर सबसे ऊपर और भावुकता 0.16 पर सबसे नीचे। सबसे तगड़ी आवाज़ बाहर से आती है: व्यवस्थितता माइनस 0.28।
काम पर ऊँचा अंक तब क़ीमत निकालता है जब किसी तरीक़े की समीक्षा हो रही हो। सवाल यही उठता है कि यह क़दम किस चीज़ से बचाता है, और ईमानदार जवाब कभी-कभी यही कि किसी चीज़ से नहीं। वही आदत काम के बीचोंबीच महँगी पड़ती है, जहाँ सवाल तय रहना चाहिए। कम अंक रखवाली की शक्ल में दिखता है: नियम क्यों बना था, इसकी याद बची रहती है।
घर में बहस अकसर जवाब पर नहीं, इस पर होती है कि सवाल खुला है भी या नहीं। एक के लिए त्योहार का तरीक़ा या बच्चे की परवरिश शुरू से तय करने की चीज़ है; दूसरे के लिए वह मिली हुई चीज़ है, जिसे आगे सौंपना अपने आप में क़ीमत रखता है। इस पैमाने पर दूर बैठे जोड़े तब आराम से चलते हैं जब दिख जाए कि झगड़ा तरीक़े का है।
ऊपरी सिरे पर काम की चीज़ रोक नहीं, छँटाई है: सवाल किसी भी रीत पर उठ सकता है, पर कुछ ही उस दाम के लायक़ होती हैं। निचले सिरे पर फ़ायदा तब आता है जब समीक्षा को कैलेंडर पर जगह मिले, क्योंकि इस सिरे पर कोई भीतरी घंटी दोबारा देखने का वक़्त नहीं बताती।
जुड़वाँ बच्चों पर हुए काम का जोड़ यह है कि बड़े पाँच में लोगों के बीच जो फ़र्क़ दिखता है उसका मोटे तौर पर आधा जीन के खाते में जाता है, और बचा हुआ बड़ा टुकड़ा उन हालात का है जो एक ही घर के भाई-बहनों तक अलग-अलग शक्ल में पहुँचते हैं। दस साल के आर-पार लोग दूसरों के मुक़ाबले अपनी जगह लगभग वहीं रखते हैं, और बदलाव सरकने की शक्ल में आता है।
हमारे मानक यह सरकना नीचे की ओर दिखाते हैं, जबकि कर्तव्यनिष्ठा के पहलू उसी दूरी पर तेज़ी से चढ़ते हैं। यहाँ एक चेतावनी भारी पड़ती है: नॉर्म तालिकाएँ अलग उम्र के अलग लोगों को आमने-सामने रखती हैं, एक इंसान को बरसों साथ नहीं ले चलतीं, इसलिए उनमें उम्र और पीढ़ी एक जैसी दिखने लगती हैं। विरासत में मिले नियमों वाले पहलू पर यह तकनीकी बारीकी नहीं: अलग दशकों में बीस बरस के हुए लोगों को अलग नियम मिले थे।
ऊँचा परंपरा पर सवाल ऊँची व्यवस्थितता के बगल में उससे बिलकुल अलग चलता है जहाँ व्यवस्थितता कम हो। पहला ढाँचा दोबारा खड़ा करता है और नई नियमावली लिख देता है, दूसरे को पुरानी बस नापसंद है। सशुल्क विश्लेषण इन्हीं मेलों की परत पर चलता है।
मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत
300 कथनों वाला संस्करण इस पहलू को दस कथनों से नापता है, 120 वाला चार से। दस में सात उलटे लिखे गए हैं, यानी सहमति यहाँ अंक घटाती है, बढ़ाती नहीं, और इससे ज़्यादा उलटे कथन सिर्फ़ एक पहलू के पास हैं। हर जवाब को 1 से 5 का मान मिलता है, उलटे कथन गिनती से पहले पलटते हैं, और कुल जोड़ लिंग तथा उम्र वाली नॉर्म तालिका से गुज़रकर पर्सेंटाइल बनता है।
अल्फ़ा बताता है कि एक ही पैमाने के कथन आपस में कितना मेल खाते हैं। शोध में 0.70 से ऊपर को ठोस माना जाता है। ये आँकड़े हमने जॉनसन के खुले डेटा से ख़ुद निकाले हैं, इसलिए इन्हें प्रकाशित मानों से मिलाया जा सकता है।
इस पन्ने पर एक भी कथन नहीं दिया गया, और यह जानबूझकर है। पहले पढ़े हुए वाक्य पर जवाब बदल जाता है, इसलिए कथन टेस्ट के भीतर ही सामने आते हैं।
300 सवाल · लगभग 40 मिनट
पूरा टेस्ट दें120 सवाल · लगभग 15 मिनट
छोटा टेस्ट देंमुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत
स्लाइडर को उस जगह ले जाइए जहाँ दूसरों के मुक़ाबले अपनी जगह लगती है, फिर टेस्ट दीजिए। चूक यहाँ दोनों तरफ़ होती है: नियमों के साथ सहज रहने वाले भी ख़ुद को अकसर ज़रूरत से ज़्यादा बाग़ी बताते हैं।
0 का मतलब है टेस्ट देने वाले लगभग सभी लोगों से नीचे, 100 का मतलब लगभग सभी से ऊपर।
यह अंदाज़ा है, माप नहीं। टेस्ट आपके जवाबों की तुलना असली लोगों के मानकों से करता है।
नहीं, और टेस्ट यह बता भी नहीं सकता। 300 कथनों में एक भी किसी पार्टी, नीति या चुनाव का ज़िक्र नहीं करता, इसलिए आँकड़ों में कोई राजनीतिक चर मौजूद ही नहीं। ऊपरी सिरे के लोग हर दिशा में धक्का देते हैं, बहुत पहले छोड़े गए इंतज़ामों की तरफ़ भी।
यह नाम व्यक्तित्व शोध से आया है और शब्द के पार्टी वाले अर्थ से पुराना है। साहित्य में यही पैमाना अकसर Values यानी मूल्य के नाम से मिलता है, जो सामग्री बेहतर बताता है। हिंदी में सीधा अनुवाद पार्टी का ठप्पा सुनाई देता, इसलिए शीर्षक परंपरा पर सवाल है।
यहाँ अच्छा अंक होता ही नहीं। ऊँचा सिरा दोबारा देखने की तैयारी ख़रीदता है और दाम घर्षण में चुकाता है; कम सिरा निरंतरता ख़रीदता है और दाम उन नियमों में चुकाता है जो अपने काम से ज़्यादा जी जाते हैं। काम की बात यह है कि अंक बाकी प्रोफ़ाइल से कहाँ मिलता है।
उलटबाँसी नहीं, और ऐसा अकसर होता है। खुलापन आयाम का नाम है और परंपरा पर सवाल उसके छह पहलुओं में एक, इसलिए आयाम का औसत इस फ़र्क़ को ढँक लेता है। अपने ही आयाम के साथ इसकी पकड़ 0.34 की है। बाकी पाँच पहलुओं का औसत 35.3 से 40.2 अंक है और इसका 29.8।
आँकड़े इससे इनकार करते हैं। सहयोग के साथ रिश्ता 0.01 का है, क्रोध के साथ माइनस 0.02 और परोपकार के साथ माइनस 0.01, यानी नाप जितना शून्य के पास जा सकती है उतना पास। सबसे तगड़ा रिश्ता व्यवस्थितता के साथ माइनस 0.28 पर है, यानी बात ढाँचे की चाहत की है।
जॉनसन के खुले आँकड़ों पर दस कथन वाले रूप की भीतरी एकजुटता 0.79 निकली और चार कथन वाले की 0.65, जो तीसों छोटे पहलुओं में सबसे नीची है। छोटा टेस्ट पाँचों आयाम ठीक दिखाता है, पर यहाँ चार कथन इशारा भर देते हैं।
लंबा संस्करण हर पहलू को दस कथनों से नापता है और छोटा चार से, पहलू दोनों में तीस। न कुछ भरना पड़ता है, न कुछ देना, और आख़िरी जवाब जाते ही पर्सेंटाइल सामने आ जाते हैं।
मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत