IPIP-NEO

सहमतता · पहलू A2

निष्कपटताA2

निष्कपटता यह नापती है कि अपनी बात मनवाने का रास्ता कौन सा चुना जाता है: वजह जैसी है वैसी रख दी जाती है, या पहले सामने वाले पर असर गढ़ा जाता है और बाकी उसे ख़ुद जोड़ने दिया जाता है। सवाल सही और ग़लत का नहीं है, और न ही यहाँ यह गिना जाता है कि किसने कब सच बोला।

  • सहमतता का दूसरा पहलू
  • 10 कथन, जिनमें आठ उलटे
  • मानक 135,947 प्रोफ़ाइल पर
  • मुफ़्त, रजिस्ट्रेशन नहीं

मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत

यह पहलू असल में क्या नापता है

बड़े पाँच में निष्कपटता खुले लेन-देन की नाप है। कथन पूछते हैं कि अपना काम निकालने के लिए तारीफ़ का पत्ता चलना आम बात है या नहीं, सामने रखी वजह और असली वजह एक ही रहती हैं या नहीं, और आधा सच कहीं रोज़ का औज़ार तो नहीं बन गया। ऊँचा अंक इतना कहता है कि जो वजह बताई गई, वही वजह थी।

नाम से भरम बनता है कि यहाँ ईमानदारी की जाँच होती है। शोध की भाषा में इसी शकल को Straightforwardness यानी सीधापन कहा जाता है, और वह नाम ज़्यादा सही बैठता है: न ज़मीर तौला जाता है, न आचरण गिना जाता है, न अच्छे कामों की कोई सूची बनती है।

दूसरे सिरे की अपनी काबिलियत है। कमरे का मिज़ाज पढ़ लेना, सूचना को उस घड़ी तक रोके रखना जब उसकी क़ीमत बने, और माँग को उसी शक्ल में रखना जिसमें वह मानी जाए: यही मोल-भाव और कूटनीति की रोज़ की कारीगरी है। पैमाना इंसान को खुले खेल और सधे हुए खेल के बीच कहीं बिठा देता है।

शोध के पन्नों पर इस पैमाने का नाम Straightforwardness मिलता है, और पुरानी किताबों में इसी ज़मीन पर सरलता तथा खरेपन जैसे शब्द चलते हैं। हमारे कथन जॉनसन के खुले IPIP संग्रह से लिए गए हैं, बिकने वाली किसी प्रश्नावली से नहीं।

तीन चीज़ें जिनसे इसे मिला दिया जाता है

तीन धारणाएँ इस पैमाने के इतने पास खड़ी हैं कि अंक अकसर उन्हीं का पढ़ लिया जाता है: एक चरित्र की बात है, एक दूसरे आयाम से आई पड़ोसन, और एक बोलने का ढंग।

अच्छा इंसान होना

अंक यह नहीं बताता कि इंसान भला है या नहीं। सबसे ऊपर बैठा आदमी उन तरीक़ों से ख़ुदगर्ज़ हो सकता है जिनके बारे में कथन पूछते ही नहीं, और सबसे नीचे बैठा आदमी वादे, पैसे और दूसरों के चैन के मामले में बेहद पक्का निकल सकता है। यहाँ एक ही तंग आदत गिनी जाती है: असर सामने वाले दरवाज़े से जाता है या नहीं।

कर्तव्यपालन (C3)

अलग-अलग आयामों की जोड़ियों में ये दोनों सबसे नज़दीक बैठती हैं: ऐसी 360 जोड़ियों में 0.69 के साथ सबसे ऊपर। सवाल फिर भी दोनों के अलग हैं। कर्तव्यपालन ली हुई ज़िम्मेदारी के बारे में है, निष्कपटता उस रास्ते के बारे में जो सामने खड़े इंसान तक जाता है। तारीख़ों का पक्का आदमी बातचीत मीठी आधी-सच्चाई पर भी चला सकता है।

मुँहफट होना

जो सोचते हैं वह कह देना और जो कुछ सोचते हैं सब कह देना, दो अलग बातें हैं। हमारे आँकड़ों में निष्कपटता सहयोग के साथ चलती है, 0.58 पर, उसके ख़िलाफ़ नहीं, और मुखरता के साथ रिश्ता हल्का उलटा है, माइनस 0.21 का। ऊँचे अंक वाले वे लोग नहीं होते जो भरे कमरे में आपकी ग़लती सुधारते हैं।

अपनी बात मनवाने के दो ढंग

कोई सिरा इंसान को बेहतर नहीं बनाता। हर सिरा कुछ ख़रीदता है और उसका बिल कहीं न कहीं भेज देता है।

ऊँची निष्कपटता: पूरी बात एक ही बार में सुनाई देती है

वजह मेज़ पर रख दी जाती है और वहीं पड़ी रहती है। किसी को आपका मतलब खोजना नहीं पड़ता, इसलिए बात जल्दी तय होती है। बिल उन कमरों में आता है जहाँ बाकी लोग कुछ न कुछ अपने पास रखे बैठे हैं: असली आँकड़ा सबसे पहले आपके मुँह से निकलता है, और खुली रखी हुई बात आपके ही ख़िलाफ़ चल सकती है।

  • मना करते वक़्त असली वजह बता दी जाती है
  • आपकी तारीफ़ का मतलब है कि काम सचमुच अच्छा हुआ
  • इंटरव्यू में ख़ुद को बेचना बेईमानी सा लगता है
  • जवाब उसी सवाल का आता है जो पूछा गया था

जो मन में है वही ज़ुबान पर आता है, और असर जमाने के खेल अजनबी लगते हैं। लोगों को हमेशा पता रहता है कि वे आपके साथ कहां खड़े हैं, और चुपचाप यही आपकी पहचान बन जाती है।

कम निष्कपटता: असर पैकिंग के साथ पहुँचता है

कहने से पहले यह सोचा जाता है कि बात गिरेगी कहाँ, और सामग्री तब तक रोक ली जाती है जब तक उसे ख़र्च करना फ़ायदे का न हो जाए। यह वही औज़ार-बक्सा है जिस पर सौदे और नाज़ुक बातचीत टिकी रहती है। बिल देर से आता है: जिसे दूसरी परत की भनक लग जाती है, वह पास आने में ज़्यादा वक़्त लेता है।

  • वजह का कितना हिस्सा बताना है, यह तय किया जाता है
  • तारीफ़ यहाँ पाप नहीं, एक आम औज़ार है
  • विनम्र गुज़ारिश के पीछे का मतलब सुनाई देता है
  • पहली कही हुई रक़म आख़िरी शायद ही होती है

क्या बताना है और कब, इसमें आपकी रणनीति साफ़ रहती है। मोलभाव सहज मैदान लगता है, और शालीन शब्दों के पीछे चल रहा खेल कई लोगों से बेहतर पढ़ में आ जाता है।

दस में करीब चार लोग बीच की पट्टी में आते हैं, और वहाँ से काम अच्छा चलता है। जिस बात का वज़न है उस पर वे सीधे रहते हैं और बाकी में नरमी बरत लेते हैं, इसलिए सच पहुँचता तो है, बस उसके किनारे घिसे हुए होते हैं।

नीचे, बीच और ऊपर की पट्टियाँ जॉनसन के 30/40/30 वाले प्रतिशतक बँटवारे से कटी हैं, ईमानदारी की किसी हद से नहीं। पैमाना लोगों से बरतने की एक आदत का ब्योरा है, न आचरण की जाँच, न इसका पता कि कल कही बात सच थी।

अंक किस ऊँचाई पर बैठते हैं

दस जवाब आपस में जुड़ते हैं, इसलिए कच्चा अंक 10 से 50 तक जाता है। नीचे का वक्र पूरे संस्करण की 135,947 पूरी प्रोफ़ाइल पर खड़ा है, और वह पैमाने पर ऊँचा टिका है: औसत 37.5 अंक।

मुख्य पर्सेंटाइल तालिका में
पर्सेंटाइलकच्चा स्कोर
1029
2534
5039
7543
9046

नमूने के आधे पुरुष 32 और 41 अंक के बीच हैं, आधी महिलाएँ 36 और 44 के बीच। फैलाव तंग है, इसलिए दो अंक दूर तक ले जाते हैं: 37 अंक पुरुष को 53वें प्रतिशतक पर रखते हैं और महिला को 35वें पर। प्रतिशतक तुलना अपने ही लिंग और उम्र वाले लोगों से करता है।

लिंग, उम्र और यह पैमाना

समूहों के औसत यहाँ अलग-अलग हैं, और बरसों के साथ दोनों रेखाएँ एक ही तरफ़ खिसकती हैं।

महिलाओं का औसत 38.6 अंक है और पुरुषों का 35.9, यानी चालीस अंक के फैलाव पर 2.75 का फ़ासला। तीस पहलुओं में यह लिंग-भेद आठवें नंबर पर आता है: सचमुच का, पर कोई अनोखा नहीं। उम्र इससे ज़्यादा खिसकाती है। पुरुष 21 साल से कम में 34.8 से चलकर 60 पार 38.7 पर पहुँचते हैं, महिलाएँ 37.4 से 41.4 पर, और चढ़ाई चारों उम्र-खानों में बनी रहती है। सबसे बुज़ुर्ग खाने में हर लिंग के करीब 250 जवाब हैं।

सहमतता की छह बहनों के बीच इसकी जगह

सहमतता छह अलग आदतों का जोड़ है, और यह वाली संगत असामान्य रखती है। पूरे मॉडल में इसका सबसे नज़दीकी साथी अपने घर में नहीं, कर्तव्यनिष्ठा में बैठा है: कर्तव्यपालन, 0.69 पर, अलग आयामों की सबसे कसी जोड़ी। भीतर सबसे पास सहयोग है, 0.58 पर, सबसे दूर भरोसा, 0.31 पर।

यह रोज़ के जीवन में कहाँ दिखता है

काम में

काम पर ऊँचा सिरा उस अंदाज़े की शक्ल में दिखता है जिस पर कुछ खड़ा किया जा सकता है। तारीख़ नामुमकिन है तो यह बात मीटिंग में सुनाई देती है, छठे हफ़्ते में नहीं। वही आदमी अपनी तरक़्क़ी की पैरवी अकसर कमज़ोर करता है, क्योंकि उसके लिए जिस पेशकश की ज़रूरत है वह उसे बनाना ही नहीं चाहता। कम सिरा योजना उसी ढाँचे में लाता है जिसमें उस पर दस्तख़त हो जाएँ।

लोगों के साथ

नज़दीकी रिश्ते दोनों के मेल पर चलते हैं। सीधे इंसान के साथ चैन रहता है, क्योंकि कुछ पेश नहीं किया जा रहा होता: जो कहा गया, वही कहा गया है। दाम घड़ी में चुकता है, क्योंकि खरी बात यह देखकर नहीं आती कि शाम उसके लिए ठीक थी या नहीं। कम अंक वाले अपनों को छाँटा हुआ हिस्सा देकर बचाते हैं।

अपने विकास में

बढ़त का सवाल यह नहीं कि और ईमानदार कैसे हुआ जाए, क्योंकि कथन उसके बारे में पूछते ही नहीं। ऊपरी सिरे पर हिलने की जगह पेशकश में है: मौका और शब्द चुन लेना बातचीत को चालाकी नहीं बना देता। निचले सिरे पर सवाल हद का है, क्योंकि सौदा बंद कराने वाला वही कान उन रिश्तों को घिस देता है जो कभी सौदे थे ही नहीं।

क्या यह बदलता है

विरासत का हिस्सा कितना है? बड़े पाँच के गुणों पर जुड़वाँ भाई-बहनों वाले अध्ययन लोगों के आपसी अंतर का मोटे तौर पर आधा जीन के खाते में डालते हैं, और बचे हुए का बड़ा टुकड़ा उन अनुभवों के खाते में जो एक ही घर में पले बच्चों तक भी अलग शक्ल में पहुँचते हैं। हिलने की जगह बची रहती है, बस हिलना धीमा है।

यह पैमाना उम्र के साथ ऊपर सरकता है। हमारे मानकों में चढ़ाई दोनों लिंगों के हर उम्र-खाने में दिखती है, और ऐसी संगत बड़ी नहीं होती: तीस पहलुओं में सबसे तेज़ चार चढ़ाइयाँ कर्तव्यनिष्ठा की हैं, और यह उनके पीछे छठे नंबर पर आता है। आँकड़े में अलग उम्र के अलग लोग मिलाए गए हैं, इसलिए यह नमूने की तस्वीर है, आपके लिए बनी कोई समय-सारणी नहीं।

अकेला अंक यह नहीं बताता कि आपकी सीधी बात बाकी प्रोफ़ाइल के बगल में क्या करती है। ऊँची निष्कपटता के साथ कम मुखरता हो तो ज़िंदगी एक शक्ल लेती है, ऊँची मुखरता के साथ दूसरी। इसी मेल पर सशुल्क विश्लेषण काम करता है।

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इस पहलू की नाप कैसे होती है

पूरा संस्करण निष्कपटता को 10 कथनों से नापता है, छोटा 4 से। दस में आठ फ़ायदे वाली चाल की तरफ़ से लिखे गए हैं, यानी उलटे कथन यहाँ किसी भी दूसरे पहलू से ज़्यादा हैं, और छोटे संस्करण में चारों उलटे हैं। जवाब 1 से 5 तक गिने जाते हैं, उलटे कथन जोड़ने से पहले पलटते हैं, और जोड़ को नॉर्म तालिका प्रतिशतक में बदल देती है।

IPIP-NEO-300कथन: 10विश्वसनीयता, अल्फ़ा 0.79नमूना: 1,35,947
IPIP-NEO-120कथन: 4विश्वसनीयता, अल्फ़ा 0.74नमूना: 3,85,801

अल्फ़ा बताता है कि एक ही पैमाने के कथन आपस में कितना मेल खाते हैं। शोध में 0.70 से ऊपर को ठोस माना जाता है। ये आँकड़े हमने जॉनसन के खुले डेटा से ख़ुद निकाले हैं, इसलिए इन्हें प्रकाशित मानों से मिलाया जा सकता है।

कथन इस पन्ने पर नहीं छापे जाते। पहले से देख लेने पर जवाब वैसे नहीं आते, और जिस पैमाने पर लगभग हर कथन लुभाने वाली चाल का ब्योरा है, वहाँ यह असर आम से बड़ा होता है।

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पहले अपना अंदाज़ा रखिए

प्रश्नावली के कुछ कहने से पहले नीचे की लकीर पर अपना अंदाज़ा रख दीजिए, फिर टेस्ट देकर मिलाइए। दोनों के बीच का फ़ासला अकसर दोनों आँकड़ों से दिलचस्प निकलता है।

50
रणनीतिक और संभलाखुला और सीधा
आपका अंदाज़ा
100 में से 50मध्यम

0 का मतलब है टेस्ट देने वाले लगभग सभी लोगों से नीचे, 100 का मतलब लगभग सभी से ऊपर।

यह अंदाज़ा है, माप नहीं। टेस्ट आपके जवाबों की तुलना असली लोगों के मानकों से करता है।

लोग इस पहलू पर क्या पूछते हैं

कम अंक का मतलब है कि मैं बेईमान हूँ?

नहीं। पैमाना पूछता है कि लोगों पर असर कैसे डाला जाता है, यह नहीं कि नियम टूटते हैं या नहीं। कम अंक वाले ख़ुद को ऐसा बताते हैं जो तारीफ़ कर सकता है, सूचना रोक सकता है और गुज़ारिश को अच्छे रंग में रख सकता है। यह झूठ नहीं है, और झूठ पकड़ना प्रश्नावली के बस की बात भी नहीं।

यहाँ अच्छा अंक कौन सा माना जाए?

कोई अच्छा अंक नहीं होता। ऊपर का सिरा साफ़ बात ख़रीदता है और दाम मोल-भाव की गुंजाइश से चुकाता है, नीचे का सिरा चाल की आज़ादी ख़रीदता है और दाम उस वक़्त से जो लोगों को पास आने में लगता है। मतलब पूरे प्रोफ़ाइल के मेल से बनता है, अकेले नंबर से नहीं।

यह कर्तव्यपालन से कैसे अलग है?

अलग आयामों की यह सबसे कसी हुई जोड़ी है, 0.69 पर, और नापती फिर भी अलग चीज़ें हैं। कर्तव्यपालन पूछता है कि ली हुई ज़िम्मेदारी पूरी हुई या नहीं, निष्कपटता यह कि सामने खड़े इंसान के साथ बरता कैसे जाता है।

महिलाओं का अंक ऊपर क्यों रहता है?

महिलाओं का औसत 38.6 है और पुरुषों का 35.9, यानी चालीस अंक के फैलाव पर 2.75 का अंतर और तीस पहलुओं में आठवाँ सबसे बड़ा लिंग-भेद। यह समूहों के औसत अलग करता है, दो लोगों को नहीं। वजहों में परवरिश, भूमिका की उम्मीदें और अपने बारे में बताने का ढंग गिनाए जाते हैं।

क्या ऊँचा अंक बनावटी तौर पर लाया जा सकता है?

आसानी से, जैसे किसी भी आत्म-रिपोर्ट में। दस में आठ कथन फ़ायदे वाली चाल का ब्योरा हैं, इसलिए सबसे असहमति भरते जाइए और ऊपरी अंक एक मिनट में बन जाएगा। मिलेगा उस इंसान का प्रतिशतक जो आप होना चाहेंगे, अपना नहीं।

दस कथनों का पैमाना कितना भरोसेमंद है?

जॉनसन के खुले आँकड़ों पर अल्फ़ा दस कथन वाले रूप का 0.79 निकला और चार कथन वाले का 0.75। संख्याएँ काम लायक हैं, पर मामूली, और यह पूरे आयाम की आदत है: सहमतता के पहलू टेस्ट का सबसे कम एकजुट खंड बनाते हैं।

अपनी असली जगह देखिए

तीस पहलू, एक प्रश्नावली: बड़ी नाप हर पहलू पर 10 कथन रखती है, छोटी 4। न खाता बनाना है, न कुछ चुकाना, और आख़िरी जवाब पर प्रतिशतक खुल जाते हैं।

मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत