IPIP-NEO

न्यूरोटिसिज्म · पहलू N4

संकोचN4

संकोच बताता है कि दूसरों की मौजूदगी भीतर कितनी जगह घेरती है। नाप देखे जाने, परखे जाने और किसी अजीब पल में पकड़े जाने की चुभन की है, लोगों के अच्छे लगने या न लगने की नहीं। ऊँचे अंक पर नज़रें वहाँ भी महसूस होती हैं जहाँ कोई देख नहीं रहा, कम अंक पर कमरा दर्ज ही नहीं होता।

  • न्यूरोटिसिज्म का चौथा पहलू
  • 10 कथन, छोटे टेस्ट में 4
  • वक्र 135,947 प्रोफ़ाइल पर
  • मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन

मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत

यह पैमाना किस चीज़ को पढ़ता है

संकोच नापता है कि दूसरों का ध्यान कितनी ऊँची आवाज़ में सुनाई देता है। कथन किसी के देखते हुए काम करने, समूह के बीचोबीच पड़ जाने और छोटी सी चूक के बाद रह जाने वाली झेंप के बारे में पूछते हैं। लोगों में अंतर इससे नहीं बनता कि दर्शक दिखा या नहीं, बल्कि इससे कि आ जाने के बाद वह कितनी जगह घेरता है।

यह पहलू न्यूरोटिसिज्म में इसलिए बैठता है कि नाप एक भावनात्मक प्रतिक्रिया की है: झेंप, और उससे ठीक पहले वाली सिकुड़न। अपने आयाम के भीतर सबसे पास दबाव में घबराहट 0.62 पर है और चिंता 0.61 पर। पर सबसे तगड़ी लकीर आयाम से बाहर उलटी दिशा में जाती है: मुखरता के साथ माइनस 0.68, 435 जोड़ियों में सबसे विपरीत।

अंक किसी एक मौक़े का नहीं, एक आम स्तर का बयान है। जिस तरफ़ कमरा चुप होकर मुड़ जाए, वहाँ हर इंसान हिलता है। पहलू उस ऊँचाई की बात करता है जिस पर बात बीत जाने के बाद लौटा जाता है, और इसकी कि रोज़ के कितने पल इसी स्वाद में डूबे रहते हैं।

अंग्रेज़ी शोध इसे Self-Consciousness कहता है, पुराने लेखन में वही ज़मीन शर्मीलेपन और पराई राय के डर के नाम से मिलती है, हिंदी में संकोच तथा झिझक दोनों उसे ढकते हैं। कथनों की जड़ खुले IPIP संग्रह में है, किसी बिकने वाली प्रश्नावली में नहीं।

तीन पड़ोसी, जिनसे यह अलग है

हिंदी में संकोच का दायरा चौड़ा है: शर्मीलापन, अकेले रहने की चाह और दबी घबराहट, तीनों इसी शब्द में समा जाते हैं। मॉडल में यह एक पतला पैमाना है, और नीचे की हर धारणा उसी अंक का पढ़ना बदल देती है।

अंतर्मुखता

संकोच नज़र के बारे में है, अंतर्मुखता लोगों के बारे में। समूहप्रियता के साथ यह पैमाना माइनस 0.49 पर चलता है: खिंचाव साफ़ है, पूरा नहीं। भरी शाम की सच्ची चाह रखने वाला अपने ऊपर टिकी नज़र से फिर भी जल सकता है, और अकेलेपन का सुख जानने वाला माइक थामकर कमरे की परवाह नहीं करता।

निदान के तौर पर सामाजिक चिंता

ऊँचा अंक स्वभाव है, वर्गीकरण की श्रेणी नहीं। विकार इस हिसाब से तय होता है कि बचते-बचाते महीनों में ज़िंदगी से कितना छूट गया, और उसे बातचीत में पेशेवर पहचानता है, प्रश्नावली कभी नहीं। इस पैमाने के ऊपरी सिरे के बहुत से लोग लोगों के सामने काम करते हैं। यहाँ किसी बीमारी की छानबीन नहीं होती।

विनयशीलता (A5)

ये दोनों 0.46 पर साथ चलते हैं और सवाल अलग पूछते हैं। विनयशीलता इसकी नाप है कि ख़ुद को दूसरों से ऊपर रखा जाता है या नहीं, संकोच इसकी कि ध्यान के नीचे बैठना कितना सहज है। तारीफ़ से भीतर तक ख़ुश होना और बीस सहकर्मियों के सामने वही तारीफ़ सुनते हुए ज़मीन में समा जाने की चाह साथ रह सकते हैं।

दोनों सिरों पर कैसा लगता है

कोई सिरा बेहतर स्वभाव नहीं है। एक कमरे को आधी नज़र से देखता रहता है और उसका दाम चुकाता है, दूसरा सीधा निकल जाता है और वहाँ का आधा पीछे छोड़ आता है।

ऊँचा संकोच: कमरा भी काम का हिस्सा है

जब तक कोई देख रहा है, ध्यान का एक हिस्सा देखे जाने पर ही लगा रहता है, और उतना काम के लिए बचता नहीं। बात कैसे गिरेगी, इसका ख़याल पहले से रहता है, और सामने वाले को भरे कमरे में नंगा छोड़ना यहाँ नहीं होता। बिल हिचक की शक्ल में आता है: सवाल बैठक के बाद गलियारे में पूछा जाता है।

  • बोलने से पहले एक छोटी रुकावट: यह कैसा सुनाई देगा
  • अजीब पल तब भी चलता रहता है जब बाक़ी सब भूल चुके
  • किसी के देखते रहने से काम की रफ़्तार गिर जाती है
  • कमरे में जिसे ग़ायब हो जाना है, वह चेहरा दिख जाता है

कोई देख न रहा हो तब भी नज़रों का एहसास बना रहता है। रात में वही बातचीत दोबारा चलती है, और अटपटा लगने का डर उन क़दमों से रोक देता है जो उठाने लायक़ थे।

कम संकोच: दर्शक दर्ज ही नहीं होते

दूसरों का ध्यान बस एक जानकारी है, और नज़रों में होना कुछ ख़र्च नहीं कराता। सौ लोगों के बीच वह सीधा सवाल पूछ लिया जाता है जिसे बाक़ी सब तौलते रह जाते हैं। अंधा कोना दूसरों की झेंप है: वह सहकर्मी जिसे नाम लेकर अलग बुलाया जाना बुरा लगा।

  • जो सवाल बाक़ी सबको पूछने में अजीब लगता है, वह पूछ लिया जाता है
  • सबके सामने हुई चूक शाम तक एक क़िस्सा बन जाती है
  • मंच, कैमरा और परिचय नाड़ी को मुश्किल से छूते हैं
  • कमरा चुप हो गया था, यह ख़बर बाद में कोई और देता है

नज़रें, राय और अनजान लोगों से भरा कमरा आपको हिला नहीं पाते। अटपटे पल चिपकते नहीं, फिसलकर निकल जाते हैं, और उनकी याद अगले दिन तक टिकती भी नहीं।

दस में से चार लोग बीच की पट्टी में हैं। ध्यान महसूस भी होता है और उसके साथ काम भी चलता है: पेशकश का पहला मिनट ज़ोर माँगता है, दूसरा कम, और झेंप चुभकर निपट जाती है।

कम, मध्यम और अधिक जॉनसन के 30/40/30 वाले पर्सेंटाइल बँटवारे से बनते हैं, किसी नैदानिक सीमा से नहीं। पैमाना वह पढ़ता है जो ध्यान के नीचे भीतर महसूस होता है, वह नहीं जो बाहर दिखता है: भीतर जलते लोग बाहर से अकसर शांत गिने जाते हैं।

वक्र की शक्ल

दस जवाबों का जोड़ कच्चा अंक बनाता है, इसलिए वह 10 से 50 तक चलता है। नीचे का वक्र पूरे संस्करण की 135,947 प्रोफ़ाइल से बना है, और उसका केंद्र 29 पर है, यानी पैमाने के बीच से थोड़ा नीचे।

मुख्य पर्सेंटाइल तालिका में
पर्सेंटाइलकच्चा स्कोर
1020
2524
5030
7535
9040

आधी प्रोफ़ाइल 23 और 34 अंक के बीच पड़ती हैं। कच्चे 29 पुरुषों में 54वाँ पर्सेंटाइल हैं और महिलाओं में 47वाँ, इसीलिए अंक अपने ही लिंग और उम्र की मानक तालिका से पढ़ा जाता है। नमूने में वही लोग हैं जिन्होंने ऑनलाइन प्रश्नावली ख़ुद चुनी।

पुरुष, महिलाएँ और दशक

न्यूरोटिसिज्म के बाक़ी पहलुओं में सिर्फ़ एक पर दोनों लिंग इससे भी पास खड़े मिलते हैं।

महिलाओं का औसत यहाँ 29.8 अंक है और पुरुषों का 28.3, यानी 40 अंक की चौड़ाई पर 1.5 का फ़ासला; इस आयाम में इससे कम दूरी सिर्फ़ उदासी पर बचती है। उम्र दोनों कतारों को एक तरफ़ खिसकाती है: पुरुष 21 से कम में 29.1 से 60 पार 25.5 पर, महिलाएँ 30.3 से 26.4 पर। सबसे ऊपरी आयु-खाने में हर लिंग के करीब 250 लोग हैं, इसलिए आख़िरी क़दम इशारा भर है।

छह बहनें और बाहर का खिंचाव

न्यूरोटिसिज्म छह अलग चीज़ें हैं, और यह वाली दूसरों की तरफ़ मुँह किए खड़ी है। पूरे टेस्ट की दस सबसे विपरीत जोड़ियों में चार में यही पहलू एक तरफ़ बैठा है, और उनमें तीन का दूसरा सिरा बहिर्मुखता में है: मुखरता, मिलनसारिता, समूहप्रियता। चौथा आत्म-सक्षमता तक जाता है, माइनस 0.52 पर।

यह किन जगहों पर सामने आता है

काम में

काम पर यह लक्षण उस ख़ाली जगह में रहता है जो कुछ समझ लेने और उसे कह देने के बीच बचती है। ऊँचे अंक वाले माँग से ज़्यादा तैयारी करते हैं और आसपास बैठे लोगों की इज़्ज़त का ख़याल रखते हैं। कम अंक वाले जल्दी हाथ उठाते हैं और कभी-कभी किसी शांत सहकर्मी के ऊपर से गुज़र जाते हैं, बिना यह दर्ज किए कि कमरा अकड़ गया था।

लोगों के साथ

पास से देखने पर ऊँचा अंक अकसर दूसरा ही इंसान निकलता है: भार देखे जाने का है, साथ होने का नहीं, इसलिए आमने-सामने वह पूरा खुल जाता है। थकाती है उसी शाम की समूह वाली शक्ल। कम अंक वाले के साथ रहना आसान है, बस बग़ल में बैठे इंसान का शर्म से गड़ जाना उससे छूट जाता है।

अपने विकास में

यहाँ हिलाने वाली चीज़ दोहराव है, इरादा नहीं। एहसास जान-पहचान से घिसता है, एक-एक हालत में अलग से, इसीलिए दूसरा भाषण पहले से हल्का पड़ता है। कम सिरे पर उपयोगी दिशा उलटी है: कमरे के पास यह ख़बर होती है कि कही हुई बात कहाँ गिरी, और यह स्वभाव उसे अपने आप नहीं उठाता।

क्या यह उम्र के साथ उतरता है

शर्मीलेपन की जड़ अकसर परवरिश में ढूँढ़ी जाती है, और जुड़वाँ लोगों पर हुआ काम इस जवाब को आधा ही सहारा देता है: ऐसे लक्षणों में आपसी अंतर का करीब पचास प्रतिशत विरासत के खाते जाता है, बाक़ी बड़ा हिस्सा उन अनुभवों के जो एक ही घर के भाई-बहनों तक अलग शक्ल में पहुँचते हैं। यह धीमे सरकने वाली मात्रा है: दस साल बाद वही लोग आपसी कतार में लगभग वहीं मिलते हैं।

आबादी की चाल नीचे की तरफ़ है, और टेस्ट के ज़्यादातर पैमानों से तेज़: 21 से कम वाले खाने से 60 पार वाले तक औसत करीब 3.7 अंक गिरता है, यानी मानक विचलन का लगभग आधा। हमारे मानक अलग-अलग उम्र के अलग लोगों की तुलना करते हैं, किसी एक ज़िंदगी का पीछा नहीं, इसलिए ढलान को रुझान मानिए, समय-सारणी नहीं।

अकेला अंक यह नहीं बताता कि भीतर कौन सा जोड़ चल रहा है। ऊँचा संकोच ऊँची मुखरता के बग़ल में दुर्लभ प्रोफ़ाइल है, और वह उस तरह नहीं पढ़ा जाता जैसे वही अंक कम मुखरता के बग़ल में। सशुल्क विश्लेषण इसी परत पर काम करता है।

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अंक के पीछे क्या है

पूरे संस्करण में इस पहलू को 10 कथन नापते हैं और छोटे में 4। दस में से छह ऐसे लिखे हैं कि सहमति अंक बढ़ाती है और चार ऐसे कि घटाती है, ताकि हर बात पर हाँ कहने की आदत अकेले से ऊँचा नतीजा न बना दे। हर जवाब 1 से 5 तक गिना जाता है, और उलटे कथन जोड़ से पहले पलट दिए जाते हैं।

IPIP-NEO-300कथन: 10विश्वसनीयता, अल्फ़ा 0.83नमूना: 1,35,947
IPIP-NEO-120कथन: 4विश्वसनीयता, अल्फ़ा 0.71नमूना: 3,85,801

अल्फ़ा बताता है कि एक ही पैमाने के कथन आपस में कितना मेल खाते हैं। शोध में 0.70 से ऊपर को ठोस माना जाता है। ये आँकड़े हमने जॉनसन के खुले डेटा से ख़ुद निकाले हैं, इसलिए इन्हें प्रकाशित मानों से मिलाया जा सकता है।

जॉनसन के खुले आँकड़ों पर अंदरूनी संगति दस कथनों वाले पैमाने पर 0.83 निकलती है और चार वाले पर 0.72। कथन इस पन्ने पर नहीं छापे गए: पहले पढ़ लेने से जवाब बदल जाते हैं।

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अंदाज़ा पहले, पैमाना बाद में

स्लाइडर वहाँ रखिए जहाँ दूसरों के बीच अपनी जगह लगती है, फिर टेस्ट दीजिए। यहाँ अंदाज़ा मुश्किल है: ध्यान के नीचे बाक़ी लोगों के भीतर क्या चलता है, वह बाहर से दिखता ही नहीं।

50
शर्मिंदा करना मुश्किलपरख के प्रति संवेदनशील
आपका अंदाज़ा
100 में से 50मध्यम

0 का मतलब है टेस्ट देने वाले लगभग सभी लोगों से नीचे, 100 का मतलब लगभग सभी से ऊपर।

यह अंदाज़ा है, माप नहीं। टेस्ट आपके जवाबों की तुलना असली लोगों के मानकों से करता है।

इस पहलू पर आम सवाल

क्या ऊँचा अंक सामाजिक चिंता विकार है

नहीं। इस पैमाने पर निदान की कोई सीमा है ही नहीं: यह ऐसी मात्रा नापता है जिस पर हर इंसान कहीं न कहीं खड़ा है। पेशेवर देखता है कि ज़िंदगी कितनी सिकुड़ी और कब से, जो बिल्कुल दूसरा सवाल है। बचाव अगर काम या रिश्तों को काट रहा हो, वह बात पेशेवर से होनी चाहिए।

यह पहलू बहिर्मुखता में क्यों नहीं, न्यूरोटिसिज्म में क्यों है

क्योंकि नाप एक भावनात्मक प्रतिक्रिया की है, लोगों की चाह की नहीं। खिंचाव आँकड़ों में दिखता भी है: मुखरता के साथ रिश्ता माइनस 0.68 का है, पूरे टेस्ट में सबसे उलटा, और मिलनसारिता तथा समूहप्रियता की तरफ़ भी लकीरें नीचे हैं। पहलू न्यूरोटिसिज्म का है, पर मुँह बहिर्मुखता की ओर।

क्या उम्र के साथ यह हल्का पड़ता है

औसत के स्तर पर हाँ। पुरुष 21 से पहले 29.1 अंक पर हैं और 60 के बाद 25.5 पर, महिलाएँ 30.3 और 26.4 पर। यह अलग-अलग उम्र के लोगों की तुलना है, फिर भी दिशा बड़े नमूनों में यही निकलती है।

कम अंक का मतलब क्या यह है कि लोगों की राय से फ़र्क़ नहीं पड़ता

पूरा वैसा नहीं। मतलब इतना है कि प्रतिक्रिया चालू नहीं होती, यह नहीं कि दूसरों की राय का कोई वज़न नहीं। मूल्य, तमीज़ और पसंद किए जाने की चाह दूसरे पैमानों पर रहती हैं। कम अंक जो छोड़ देता है वह अपने आप आने वाला संकेत है कि बात ग़लत जगह गिरी।

क्या कोई मिलनसार भी हो सकता है और संकोची भी

हाँ, और यह जोड़ आम है। समूहप्रियता के साथ माइनस 0.49 का रिश्ता उन लोगों के लिए बहुत जगह छोड़ता है जिन्हें भीड़ अच्छी लगती है और अपने ऊपर टिकी नज़र भारी पड़ती है। एक सवाल यह है कि कितने लोग चाहिए, दूसरा यह कि उनकी नज़र में होना कैसा लगता है।

इतना छोटा पैमाना कितना भरोसेमंद है

जॉनसन के आँकड़ों पर दस कथनों वाला संस्करण 0.83 देता है और चार वाला 0.72। दोनों काम के हैं, और इनके बीच की गिरावट पूरे टेस्ट की पाँच सबसे बड़ी में गिनी जाती है। पहलू के स्तर पर छोटे संस्करण का दाम यही है: आयाम का अंक कटौती कहीं बेहतर झेलता है।

इस पैमाने पर अपनी जगह

पूरा टेस्ट 300 कथनों से तीसों पहलू नापता है, छोटा 120 से वही तीस। दोनों मुफ़्त हैं, और आख़िरी जवाब के साथ ही संकोच का पर्सेंटाइल सामने आ जाता है।

मुफ़्त, बिना रजिस्ट्रेशन, नतीजा तुरंत