ज़िंदगी में दबाव की मात्रा
नाम पढ़कर लगता है जैसे सवाल यह हो कि किसी के हिस्से कितनी मुश्किलें आती हैं। पैमाना यह एक बार भी नहीं पूछता। एक ही हफ़्ता और एक ही समयसीमा झेल रहे दो लोग इसके दो अलग सिरों पर हो सकते हैं। मापा सिर्फ़ यह जाता है कि बोझ आ चुकने के बाद भीतर क्या होता है, न उसका आकार और न किसी का दोष।